राइट टू इन्फार्मेशन एक्ट 2005

 

 

स्थापना एवं उद्देश्य
इस निगम की स्थापना 29 मार्च 1967 को भारत सरकार एवं राज्य सरकार के संयुक्त अंशपूंजी विनियोजन से हरित क्रान्ति योजना सफल बनाने के उद्देश्य से की गई थी। वित्तीय वर्ष 1978-79 तक भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निगम में बराबर-बराबर अंशपूंजी विनियोजन किया जाता रहा। वर्ष 1978-79 में राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार भारत सरकार का अंशपूंजी विनियोजन स्टेट एग्रोज में बन्द कर दिया गया तथा एग्रो की योजना राज्य सरकारों को हस्तान्तरित कर दी गई। तत्पश्चात् उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यू0पी0 एग्रो में अंशपूंजी विनियोजन किया जाता रहा। राज्य सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार वर्ष 1994-95 में यह अंशपूंजी विनियोजन भी बन्द कर दिया गया।

भारत सरकार द्वारा निगम में पूर्व किया गया अंशपूंजी विनियोजन रू. 332.83 लाख की अंशपूंजी भी भारत सरकार के आदेश से उत्तर प्रदेश सरकार को हस्तान्तरित कर दी गई तथा अनु सचिव, भारत सरकार के पत्र सरकार 2-1/200-एम.वाई(ए.आई.) दिनांक 29 अगस्त, 2001 द्वारा भारत सरकार के अंशक प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश सरकार को हस्तान्तरित कर दिये गये। इस प्रकार निगम की अंशपूंजी विनियोजन में भारत सरकार का अंश पूर्ण रूप से समाप्त हो गया तथा निगम की अंशपूंजी पूर्ण रूप से राज्य सरकार में विनियोजित हो गई। वर्तमान में निगम की अधिकृत एवं चुकता पूंजी रू. 60.00 करोड़ है। वर्तमान में यह निगम प्रदेश के कृषकों को उच्च गुणवत्ता वाले रसायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाएं, प्रमाणित बीज, विभिन्न प्रकार के कृषि यन्त्र / उपकरण आदि उचित मूल्य पर आसानी से उपलब्ध करा रहा है।